- महाकाल मंदिर पहुंचे सुनंदा शर्मा और मनीष मल्होत्रा: नंदी हॉल से किए दर्शन, लिया आशीर्वाद
- एक्ट्रेस सारा अर्जुन ने महाकाल में की भस्म आरती: सुबह 4 बजे पहुंचीं, 2 घंटे तक रहीं शामिल
- श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती, दिव्य श्रृंगार के साथ हुए बाबा महाकाल के दर्शन; आरती में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु
- पंचकोशी यात्रा 12 अप्रैल से: 2 दिन पहले ही उज्जैन पहुंचने लगे श्रद्धालु, हर साल 2-3 लाख की भागीदारी
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ दिव्य श्रृंगार, गूंजी ‘जय श्री महाकाल’
महाकाल-रुद्रसागर प्रोजेक्ट:ब्रह्मा बने सारथी, सूर्य-चंद्र रथ के पहिए
भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध कर संसार को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। महाभारत और अन्य धर्मग्रंथों में शिवजी की यह कथा काफी प्रचलित है। त्रिपुरासुर के वध के लिए सभी देवी-देवताओं ने सहयोग किया था। जिस रथ पर सवार होकर शिव ने त्रिपुरासुर को मारा उस रथ के सारथी ब्रह्माजी बने, सूर्य और चंद्र रथ के पहिए बन गए। चारो वेद रथ के चार घोड़ बन गए। धनुष की डोर वासुकी नाग बन गए।
धर्मग्रंथों के इस कथानक को महाकाल-रुद्रसागर प्रोजेक्ट के पब्लिक प्लाजा के पास मूर्ति स्वरूप में साकार किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी के इंजीनियर कृष्णमुरारी शर्मा के अनुसार 60 फीट लंबे, 15 फीट चौड़े पेडस्टल पर त्रिपुरासुर वध का कथानक आकार ले रहा है। रथ की ऊंचाई 25 फीट है। यह रथ और प्रतिमाएं एफआरपी (फाइबर रैनफोर्स्ड प्लास्टिक) से बनाई जा रही है जो सौ साल तक भी खराब नहीं होगी।